SEO : WordPress में OnPage SEO कैसे करे? जानें

How to do OnPage SEO in WordPress? learn

How to do OnPage SEO in WordPress? learn
How to do OnPage SEO in WordPress? learn

SEO : क्या आप जानते है सर्च इंजन ऑप्टिमाइज/Search Eingen Optimize (SEO) के नजरिये से Meta Title-मेटा टाइटल और Meta Description बहुत हीं महत्वपूर्ण होता है। मेटा टाइटल और डिस्क्रिप्शन On Page SEO के सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर में से एक होते हैं क्योंकि ये दोनों ही यूजर को सर्च इंजन रिजल्ट पेज पर दिखाई देते हैं।अगर आप इन्हें लिखने में कोई गलती करते हैं आप अपने अनेक विजिटर को खो सकते हैं।  अधिकतर News ब्लॉगर अपने News/ब्लॉग को SEO के द्वारा Google (गूगल) के पहले पेज पर रैंक तो करवा लेते हैं लेकिन टाइटल (Title) और डिस्क्रिप्शन (Description) सही ना लिखने के कारण उनके ब्लॉग पर ट्रैफिक नहीं आता है, और उनका CTR हमेशा कम रहता है। क्योंकि वे अपने टाइटल और डिस्क्रिप्शन को सही तरीके से ऑप्टिमाइज़ नहीं करते हैं।

मैंने अधिकतर वेबसाइट में देखा है कि Title और Description को अधिकतर ब्लॉगर सर्च इंजन के Point of views से लिखते हैं और उनकी वेबसाइट रैंक भी कर जाती है. पर उन वेबसाइट पर क्लिक बहुत कम मिलते है जिससे उनकी रैंकिंग खुद ही Down होने लगती है। इसलिए हमेशा टाइटल और डिस्क्रिप्शन को यूजर और सर्च इंजन दोनों के Point of View से लिखना चाहिए।

Title इन बातों को रखे ख्याल

Length – टाइटल की length अधिकतम 40 से 60 शब्दों की होनी चाहिए। क्योकि अगर Title की Length अधिक होगी तो टाइटल सर्च इंजन में यूजर को पूरा नहीं दिखाई देता।

Keyword – टाइटल में हमेशा ब्लॉग पोस्ट का फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल करें। यह जितनी शुरुवात में हो उतना फायदा आपको फायदा मिलता है।

User Intent – यूजर जो Query कर रहा है उसके द्वारा वह क्या जानना चाहता है अर्थात User Intent क्या है इसे समझें और फिर इसके अनुसार टाइटल बनायें।

Unique Title – इस बात का भी जरुर ध्यान देना चाहिए कि ब्लॉग के हर एक वेबपेज का एक अलग टाइटल होना चाहिए. और जिस कीवर्ड पर आप आर्टिकल लिख रहे हैं, उस कीवर्ड पर जो वेबसाइट रैंक कर रही हैं उनसे भी अगल टाइटल लिखने की कोशिस करें।

Use Call to Action Word –  टाइटल को आकर्षक और Catchy बनाने के लिए आप Call to Action Word का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे आप Hindi में आर्टिकल लिखते हैं तो जानिए, सीखिए, बनाये, आखिर क्यों, देखें वीडिया, हो जायेंगे हैरान, वायरल वीडियो आदि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं , जिससे Viewers आपके आर्टिकल/News को पढने के उत्सुक होंगे।

Meta Description

अब हम बात करेंगे मेटा डिस्क्रिप्शन की। आपको बता दूं की मेटा डिस्क्रिप्शन आपके वेबसाइट को डिफाइन करने में मदद करता है। इसलिए वेबसाइट के प्रत्येक पेज की एक यूनिक मेटा डिस्क्रिप्शन होना चाहिए। यही यूनिक मेटा डिस्क्रिप्शन साइटलिंक्स की मदद करता है पोस्ट को ऑटोमेटिकली SERPs में display करने के लिए।

Meta Description को कैसे लिखें

Length – सबसे पहले हम बात करेंगे Length की।  Description की Length  को हमेशा 140 से 150 शब्दों के बीच में होनी चाहिए।

Keyword – फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल डिस्क्रिप्शन के शुरुवात में ही आप कर सकते हैं।

User Friendly – डिस्क्रिप्शन को हमेशा User Friendly लिखना चाहिये। User Friendly का मतलब है कि Description में यूजर क्या जानना चाह रहा है उसके बारे में लिखना चाहिए।

Image Alt Tags/TEXT

 Image Alt Tags/TEXT : ज्यादा तर पोस्ट लिखनेवाले इस टेग पर ध्यान नहीं देते हैं। ज्यादातर वो जो अपने समय की बचत करने में लगे रहते है। पर ब्लाग वेबसाइट की दूनिया में इसे Ignore नहीं करना चाहिए। अगर आप अच्छी रैंकिग चाहते हैं तो। अब आपके मन में एक सवाल होगा कि  होता क्या है और इसे क्या कहते हैं। Alt text का पूरा नाम Alternative text है. इसे “alt description” और “alt attribute” के रूप में भी जाना जाता है। यह सर्च इंजन (search engine) के लिए एक text alternative प्रदान करने के लिए HTML में एक image tag में जोड़ा गया एक फीचर है।

यह सर्च इंजनों को यह जानने में मदद करता है कि एक image किस बारे में है क्योंकि वे images को देख या व्याख्या नहीं कर सकते। ऑल्ट टेक्स्ट को गति और SEO के लिए images को optimize करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक blank image box में appear होता है जब image किसी कारण से display नहीं की जा सकती जैसे slow connection, broken URL या user स्क्रीन रीडर का उपयोग कर रहा है। इस प्रकार, Alt tag सर्च इंजन क्रॉलर को images को ठीक से index करने में मदद करने के लिए बेहतर image descriptions प्रदान करते हैं।

Header/ Heading Tags

Header/ Heading Tags : अपने वेबपेज को जल्दी Index कराने के लिए heading tags बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.  साथ में पुरे page को सही ढंग से categorize करने के लिए इनका बड़ा योगदान होता है। आप जब भी अपनी वेबसाइट के लिए कोई आर्टिकल लिखते हैं तो आप Heading Tag का प्रयोग जरुर करते होंगे। पर क्या आप जानते हैं कि हैडिंग टैग क्या होते हैं (Heading Tag in SEO Hindi), Heading tag का इस्तेमाल क्यों किया जाता है। और SEO के नजरिये से यह कितना महत्वपूर्ण हैं। नहीं तो आईये जानते हैं। जब भी आप कोई अख़बार या कोई मैगजीन पढ़ते हैं तो आपको हैडिंग शुरुवात में लिखी मिलती है। इन हैडिंग की मदद से आप उन टॉपिक को Find कर सकते हो जिसमे आपकी रूचि है या जिन्हें आप पढ़ना चाहते हो। ठीक इसी प्रकार एक ब्लॉग में भी होता है। जो ब्लॉग लिखते (Blogger) हैं वे हैडिंग टैग का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी मदद से कोई भी Readers ब्लॉग में अपने मतलब के टॉपिक ढूंड सकता है और उसे पढ़ सकता है।

हैडिंग (Heading) के प्रकार

मुख्यतः 6 प्रकार की हैडिंग का प्रयोग एक पोस्ट में किया जाता है। यह हैडिंग H1 से लेकर H6 तक होती है। H1 का महत्व सबसे अधिक होता है, इसके बाद H2 का तथा इसी प्रकार यह क्रम घटते जाता है और H6 का महत्व सबसे कम होता है। जब भी क्रॉलर हमारे वेबपेज में आता है तो वह आर्टिकल को H1 टैग से क्रॉल करना शुरू करता है. और Proper heading बने होने के कारण क्रॉलर पुरे वेबपेज को आसानी से क्रॉल कर लेता है। अब मानिये, अगर हम हैडिंग टैग का इस्तेमाल नहीं करते है और उसके स्थान पर Heading की formatting कर देते है , मतलब हैडिंग का font बढ़ा देते हैं, उसे Bold कर देते हैं. तो ऐसे में Reader तो आसानी से पहचान लेगा कि हमारी Main Heading क्या है और बाकी हैडिंग क्या हैं।

लेकिन सर्च इंजन के रोबोट्स यह नहीं पहचान पाते है, बिना हैडिंग टैग के उन्हें पूरा वेबपेज एक पैराग्राफ के सामान दिखाई देता है.। और क्रॉलर को वेबपेज क्रॉल करने में बहुत मुश्किल होती है. जिसके कारण Indexing में भी समय लगेगा। इसलिए ब्लॉग पोस्ट में हैडिंग टैग का इस्तेमाल किया जाता है. यह तो था सर्च इंजन के नजरिये से हैडिंग टैग का महत्व.

हमें  H1 tag को लिखते समय इन बातों का रखें ध्यान –

  • आपको पुरे Webpage में केवल एक ही H1 का प्रयोग होना चाहिए.
  • H1 tag में reader क्या जानना चाह रहा है, उस बारे में लिखना है.
  • H1 tag में हमेशा Keyword का प्रयोग करें , यह SEO के नजरिये से भी महत्वपूर्ण है.
  • H2 Heading
  • H2 का प्रयोग वेबपेज में किसी एक टॉपिक को Describe करने के लिए किया जाता है. आपके वेबपेज में जितने अधिक टॉपिक होंगे उतने H2 हैडिंग का आप प्रयोग कर सकते हैं.
  • H3 Heading
  • अगर आपके वेबपेज में H2 के अन्दर कोई टॉपिक है तो उसे Describe करने के लिए H3 का प्रयोग करते हैं.
  • H4 Heading
  • अगर वेबपेज में हम H3 को और अधिक Details में बताना चाहते हैं तो H4 का प्रयोग किया जाता है.
  • H5 Heading
  • H5 का प्रयोग वेबपेज में H4 को और अधिक detail में समझाने के लिए किया जाता है.
  • H6 Heading 
  • H6 वेबपेज की सबसे छोटी हैडिंग होती है. इसका प्रयोग वेबपेज को पुरे detail में explain करने के लिए किया जाता है.

Internal और External Linking  से SEO

Internal and External Linking: Internal linking और external linking Seo को improve करने के एक Important factor होते है। चलिए अब हम detail में Internal linking कैसे करते है जानते हैं। Post-Blogging के अंदर Linking का मतलब है एक page को दूसरे page से जोड़ना। अब question आता है हम pages को आपस में कैसे जोड़े। तो इस सवाल का उत्तर है, हम एक page को दूसरे पेज से Html के माध्यम से या URL के माध्यम से जोड़ते है। इस process को ही हम Blog/Post Internal Linking कहते है। इंटरनल लिंकिंग Onpage SEO के लिए महत्वपूर्ण होता है और इसको करने से आपके pages को लिंक जूस मिलता है। लिंक जूस Pass होने से आपकी Ranking Improve होती है।

External Linking – एक्सटर्नल लिंकिंग का अर्थ है अपने blog के एक page को किसी अन्य blog के page से जोड़ना। जैसे – अगर आप एक post लिखते है और उसके अंदर आप किसी word को Explain नहीं करते है , परन्तु आप उस शब्द को explain करने के लिए किसी अन्य ब्लॉग के पेज से उस शब्द को जोड़ते है, उसी को ही एक्सटर्नल लिंकिंग कहते है। यह आपके पेज की information को complete करने में बहुत ज्यादा मदद करता है। Google उस पेज की ranking ज्यादा improve करता है जिस पेज में complete और quality की information होती है।

Internal & External linking kaise kare-

सबसे पहले हम सीखते है Internal linking कैसे करते है ।

1 ) सबसे पहले step में आपको Login करके Deshboard में जाना है।
2 ) आपके सामने WordPress का dashboard open हो गया होगा।
3 ) यहाँ पर आपको sidebar में post का option नज़र आ रहा होगा, इस पर क्लिक करे।
4 ) पोस्ट के अंदर आपको वह आर्टिकल सेलेक्ट करना है जिसकी आप लिंकिंग करना चाहते है।
5 ) Article open होने के बाद आपको वह Sentance select करना है जिसकी आप इंटरनल linking करना चाहते है।
6 ) Keyphrase select करने के बाद , आपको Title और URL के नीचे Tab दिख रहा होगा, यहाँ पर आपको linking का एक option नज़र आ रहा होगा।
7 ) इस पर click करे , आपके सामने एक new tab open हो जायगा।
8 ) इस tab में आप जिस पोस्ट को connect करना चाहते है उसके title का initial word लिखे।
9 ) आपके सामने post का URL आ जायगा। आपको उसको select करके apply कर देना है।
10 ) आपकी internal linking हो जायगी और इसी प्रकार आप external linking भी कर सकते है।

मेरा लेख इंटरनेट गेमों की खुमारी में गुम होता बचपन

Internal Linking का फायदा

सबसे बड़ा Internal Linking का फायदा यह है, इससे आपके Website का Bounce Rate Decrease होता है क्योकि user एक page से दूसरे पेज पर move करता है , जिसकी वजह से वह आपके ब्लॉग पर अधिक समय व्यतीत करता है। इसका दूसरा मुख्य फायदा यह है, आपके ब्लॉग के Page Views increase होते है। यह आपके ब्लॉग ट्रैफिक को बढ़ाने में आपकी मदद करता है। internal linking करने से आपके post की Ranking improve होती है। जैसे – अगर आपके blog का एक पोस्ट google पर 10 position पर rank कर रहा है और दूसरा post 80 position पर rank कर रहा है। अगर आप 80th position वाले को 10th position वाले से लिंक करते है तो आपके दूसरे पोस्ट की ranking भी इम्प्रूव होने लगती है। इसको करने से आपके article का SEO improve होता है। Internal लिंकिंग करने से आपके पोस्ट fastly google पर index होते है। यह कुछ major issue जैसे discover currently not index और crawled currently not index की problem को solve करने में मदद करती है।

Internal Linking करने के कुछ Tips 

 Internal linking करते समय आपको हमेशा Topic Related ही links Add करने चाहिए। मतलब Post के Topic से जुड़े ही Internal link बनाए। आपको अपनी Post में Unwanted Links नहीं बनाने है इससे user परेशान हो जाता है और User Engagement खराब होने लगता है। Internal linking बनाते समय आपको उचित Anchor Text का उपयोग करना चाहिए ताकि आपकी पोस्ट Right Keywords पर Rank करे। Unrelated Topic Links को Avoid करे ताकि आपके Page Views Increase होने लगे। आपको Relevant पोस्ट के अंदर Right पोस्ट को लिंक करना है ताकि आपका seo improve हो। आपको अपनी पोस्ट के वर्ड काउंट के अनुसार ही इंटरनल लिंक्स देने चाहिए।

External Linking के लिए कुछ Tips

आपको अपने आर्टिकल को परिपूर्ण बनाने के लिए Right Topic को ही External लिंक करना चाहिए।) आपको 1000 word के आर्टिकल में कम से कम 1 External लिंक बनाना चाहिए। आपको सही टॉपिक या शब्द को एक्सटर्नल लिंक करना चाहिए। आपको High Content वाली वेबसाइट को ही एक्सटर्नल लिंक करना चाहिए। आपको एफिलिएट लिंक्स देते समय वेबसाइट की Authority और स्पैम स्कोर अवस्य Check करना चाहिए।

आप उपरोक्त बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इन दो बातों का ध्यान पोस्ट करने के दौरान जरूर रखें। पहला है Anchor Text। आपकी Anchor Text और url दोनों एक दुसरे के साथ match होने चाहिए, इससे rank करने में आसानी होती है। दूसरा है Url Structure। आपके website की url structure ठीक होनी चाहिए, साथ में ये SEO-friendly भी होनी चाहिए जिससे की इन्हें easily rank कराया जा सके। साथ में प्रत्येक url में एक targeted keyword होनी चाहिए, इसका मतलब की आपकी आपके url के साथ match करनी चाहिए।

उम्मीद है कि इस अर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको SEO करने में मदद अवश्य मिलेगा।

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