दुखद एवं त्रासद टिप्पणी का बचाव क्यों?

 -ललित गर्ग- नया भारत-सशक्त भारत को निर्मित करते हुए आज भी स्त्रियों के प्रति प्रदूषित एवं अश्लील दृष्टिकोण का कायम रहना, परेशान करता है। विडम्बना तो यह है कि इस तरह का अनैतिक, अमर्यादित एवं अश्लील दृष्टिकोण आम आदमी का नहीं बल्कि देश के…
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बच्चों पर आभासी दुनिया के तिलिस्मी संसार का कहर

-ललित गर्ग :- आजकल ज्यादातर बच्चों को मूड स्विंग की समस्या रहती है, वे असंतुलित मानसिकता से ग्रस्त होते जा रहे हैं। वे पल भर में खुश, तो दूसरे ही पल चिड़चिड़े, तनावग्रस्त व मायूस हो जाते हैं। दरअसल, मूड स्विंग का एक बहुत बड़ा कारण मोबाइल का…
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लोकतंत्र को कमजोर करती है सांसदों की गैरहाजिरी

- ललित गर्ग - सांसदों की उपस्थिति को लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर तीखे तेवर में दिखे। इस मुद्दे पर वे बहुत सख्त है और इस विषय को लेकर उन्होंने सांसदों को चेताया भी है और सुदृढ़ लोकतंत्र के लिये इसे प्राथमिक आवश्यकता बताई।…
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भिक्षा मांगने की त्रासदी को जीना राष्ट्रीय शर्म है

 - ललित गर्ग - एक आदर्श शासन व्यवस्था की बुनियाद होती है समानता, स्वतंत्रता, भूख एवं गरीबी मुक्त शांतिपूर्ण जीवनयापन। राष्ट्र एवं समाज में भूख एवं गरीबी की स्थितियां एक त्रासदी है, विडम्बना है एवं दोषपूर्ण शासन व्यवस्था की द्योतक है। आजादी…
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मेरा लेख इंटरनेट गेमों की खुमारी में गुम होता बचपन

ललित गर्ग :- कोरोना महामारी के लाॅकडाउन के कारण स्कूली शिक्षा आॅनलाइन हुई और छोटे-छोटे बच्चें इंटरनेट की दुनिया एवं इंटरनेट गेमों से जुड़ गये। ये गेम एवं इंटरनेट की बढ़ती लत बच्चों में अनेक विसंगतियों, मानसिक विकारों एवं अस्वास्थ्य के…
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आदिवासी अपनी संस्कृति के प्रति उदासीन क्यों?

ललित गर्ग  अन्तरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस, विश्व में रहने आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस उन…
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