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भिक्षा मांगने की त्रासदी को जीना राष्ट्रीय शर्म है

 - ललित गर्ग - एक आदर्श शासन व्यवस्था की बुनियाद होती है समानता, स्वतंत्रता, भूख एवं गरीबी मुक्त शांतिपूर्ण जीवनयापन। राष्ट्र एवं समाज में भूख एवं गरीबी की स्थितियां एक त्रासदी है, विडम्बना है एवं दोषपूर्ण शासन व्यवस्था की द्योतक है। आजादी…
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मेरा लेख इंटरनेट गेमों की खुमारी में गुम होता बचपन

ललित गर्ग :- कोरोना महामारी के लाॅकडाउन के कारण स्कूली शिक्षा आॅनलाइन हुई और छोटे-छोटे बच्चें इंटरनेट की दुनिया एवं इंटरनेट गेमों से जुड़ गये। ये गेम एवं इंटरनेट की बढ़ती लत बच्चों में अनेक विसंगतियों, मानसिक विकारों एवं अस्वास्थ्य के…
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आदिवासी अपनी संस्कृति के प्रति उदासीन क्यों?

ललित गर्ग  अन्तरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस, विश्व में रहने आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस उन…
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अनाथ बच्चों को पालने की सोच को सच बनाएं

- ललित गर्ग- भारत को सशक्त ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, स्नेहिल एवं आत्मीय बनाने की भी जरूरत है, इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने अनूठी एवं प्रेरक पहल की है। मोदी सरकार के सात साल पूरे होने के मौके पर कोरोना के कारण अनाथ हुए…
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कोरोना का खतरा-नये उपाय एवं सजगता जरूरी

ललित गर्ग कोरोना का खतरा फिर डरा रहा है, कोरोना पीड़ितों की संख्या फिर बढ़ने लगी है, इन बढ़ती कोरोना पीड़ितों की संख्या से केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चिन्तित होने से काम नहीं चलेगा, आम जनता को जागरूक एवं जिम्मेदार होना होगा। हमने पूर्व…
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संत रैदास की अनूठी भक्ति एवं सिद्धि

ललित गर्ग  महामना संत रैदास भारतीय संत परम्परा और संत-साहित्य के महान् हस्ताक्षर है, दुनियाभर के संत-महात्माओं में उनका विशिष्ट स्थान है। क्योंकि उन्होंने कभी धन के बदले आत्मा की आवाज को नहीं बदला तथा शक्ति और पुरुषार्थ के स्थान पर कभी…
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किसान आन्दोलन पर देशद्रोह एवं अशांति के धब्बे?

-ललित गर्ग:- सर्वोच्च न्यायालय ने जन-प्रदर्शनों, आन्दोलनों, बन्द, रास्ता जाम, रेल रोकों जैसी स्थितियों के बारे में जो ताजा फैसला किया है, उस पर लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से गंभीर चिन्तन होना चाहिए, नयी व्यवस्थाएं बननी चाहिए। भले ही…
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